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ॐ सूर्याय नमः

छठ मैया की जय हो... सूरज देव के भक्ति में समर्पित एक भावनात्मक परंपरा

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Official Source - Chhath Puja Samiti

ओजागांव (भुरागांव) श्री श्री छठ पूजा समिति

Estd-1966

सूर्य देव और छठी मैया की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए पवित्र नदियों के तट पर आयोजित होने वाले इस पावन पर्व में सभी का स्वागत है

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समिति के बारे में

ओजागांव (भुरागांव) श्री श्री छठ पूजा समिति एक समर्पित स्वयंसेवी संगठन है जो छठ पूजा के पवित्र पर्व को अत्यंत भक्ति और उत्साह के साथ आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारा मुख्य उद्देश्य छठ पूजा की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सभी भक्तगण शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें।

हमारी समिति की जड़ें बहुत गहरी और ऐतिहासिक हैं। इस सेवा यात्रा की शुरुआत वर्ष 1966 में आदरणीय संस्थापक श्री सिंहासन चौहान जी के दूरदर्शी नेतृत्व और अटूट श्रद्धा के साथ हुई थी। उनके द्वारा बोया गया भक्ति का यह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जो पिछले कई दशकों से क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को जीवंत रखे हुए है।

हम घाटों की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, प्रसाद वितरण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे विभिन्न कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। हमारी समिति समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ लाने और इस महापर्व के दौरान भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देने में विश्वास रखती है। हम समाज सेवा और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

Samiti Members

छठ पूजा के बारे में

छठ पूजा हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश,असम और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए समर्पित है, जो प्रकृति और जीवन के दाता हैं। यह पर्व लोक आस्था का महापर्व है, जिसमें उगते और डूबते सूर्य दोनों को अर्घ्य देकर उनकी पूजा की जाती है।

यह त्योहार चार दिनों तक चलता है: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य। इन दिनों में भक्त कठोर उपवास रखते हैं, पवित्र स्नान करते हैं, और सूर्य को फल, ठेकुआ और अन्य विशेष प्रसाद चढ़ाते हैं।

समिति का लक्ष्य इस पवित्र उत्सव को सुचारू और भक्तिमय वातावरण में संपन्न कराना है, सभी भक्तों की सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए। हम सभी से अनुरोध करते हैं कि वे स्वच्छता और शांति बनाए रखने में सहयोग करें।

Chhath Puja

छठ पूजा की परंपराएँ

छठ पूजा सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह कई प्राचीन और पवित्र परंपराओं का संगम है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं।

  • **नहाय-खाय:** पहले दिन, भक्त नदी में स्नान करते हैं और चावल, दाल, और लौकी की सब्जी जैसे सात्विक भोजन खाते हैं। यह शुद्धता की शुरुआत है।
  • **खरना:** दूसरे दिन, निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को, गुड़ और चावल की खीर (रसियाव) और रोटी का प्रसाद बनाकर खाया जाता है। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
  • **संध्या अर्घ्य:** तीसरे दिन, भक्त घाटों पर परिवार सहित एकत्र होते हैं और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान सूप में फल, ठेकुआ, गन्ना आदि चढ़ाए जाते हैं।
  • **उषा अर्घ्य:** चौथे और अंतिम दिन, सूर्योदय से पहले घाट पर पहुँचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।
  • **प्रसाद का महत्व:** छठ का प्रसाद जैसे ठेकुआ, खजूर, चावल के लड्डू आदि बांस की बनी टोकरियों (सूप) में ही रखे जाते हैं, जो पवित्रता का प्रतीक है।
  • **घाटों पर व्यवस्था:** समिति द्वारा घाटों पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि भक्त बिना किसी बाधा के पूजा कर सकें।

पूजा कार्यक्रम 2026

इस वर्ष, हमारी समिति छठ पूजा को और भी भव्य और सुचारु बनाने के लिए कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। सभी भक्तों से सादर अनुरोध है कि वे इसमें भाग लें।

13 नवंबर, 2026

नहाय खाय

प्रातः स्नान करके शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करना। घर की सफाई और पवित्रता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

14 नवंबर, 2026

खरना

पूरे दिन उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

15 नवंबर, 2026

संध्या अर्घ्य

शाम को सूर्यास्त के समय नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। मुख्य घाटों पर भव्य आयोजन।

16 नवंबर, 2026

उषा अर्घ्य

सूर्योदय से पहले नदी तट पर पहुँचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

छठ सांस्कृतिक डांस प्रतियोगिता

समिति छठ महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक डांस प्रतियोगिता का आयोजन करती है। अपनी प्रतिभा दिखाएं और आकर्षक पुरस्कार जीतें!

नियम और शर्तें:

  • प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आयु सीमा 5 से 25 वर्ष है।
  • प्रदर्शन केवल छठ पूजा या भक्ति गीतों पर आधारित होना चाहिए।
  • एकल और समूह (अधिकतम 9 सदस्य) दोनों प्रदर्शन स्वीकार्य हैं।
  • प्रत्येक प्रदर्शन की अवधि 3 से 5 मिनट के बीच होनी चाहिए।
  • पंजीकरण की अंतिम तिथि: 10 नवंबर, 2026।
  • पंजीकरण शुल्क: ₹100 प्रति व्यक्ति (समूह के लिए ₹300)।

पंजीकरण के लिए, कृपया रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाएं या समिति कार्यालय में आएं।

आकर्षक पुरस्कार:

प्रथम पुरस्कार

₹नकद रूपया, ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और विशेष स्मृति चिन्ह

द्वितीय पुरस्कार

₹नकद रूपया, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र

तृतीय पुरस्कार

₹नकद रूपय, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र

चतुर्थ पुरस्कार

नकद रूपया, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र

पंचम पुरस्कार

नकद रूपया, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र

षष्ठ पुरस्कार

नकद रूपया, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र

🎵 मधुर छठ भजन

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चार पहर हम जल थल सेविला
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हमारी समिति

हमारी समिति के समर्पित सदस्य, जो छठ पूजा के भव्य आयोजन को संभव बनाते हैं।

समिति से संपर्क करें

पता

ब्रह्मपुत्र फेरी घाट, भुरागांव, मोरीगांव, असम - 782121

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+91 98765 43210

ईमेल

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